मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

DEVI

कुमांऊ के दूरस्थ क्षेत्र मैं बसा एक गाँव है बुदनी, गावं मैं कुल मिलकर २०-२२ घर है, यंहा पर सिर्फ एक ही सरकार चलती है; आस्था की सरकार, पिछले साल ही आयी पहाड़ी बाढ़ मैं बहुत से घर नष्ट हो गए।   घर से जो मर्द काम पर निकले वो वापिस ही नहीं आये।  लेकिन उनकी औरतो मैं अभी भी श्रद्धा बाकी है. ऐसा ही घर एक  है नलिनी का. उसके बाबा एक सप्ताह के लिए गए लेकिन दो महीने गुजरने के बाद भी अभी तक नहीं लौटे।  घर का सारा जरुरी राशन   चाचा के द्वारा ही आता है. माँ तो जैसे इस बोझ के निचे दबे जाती है, अभी १५ दिन पहेले की ही बात है, हमारी सारी बकरिया चाचा ने अपने फार्म रख ली , माँ कहती है कि सही हुआ, नही तो बकरी के चारे की भी मुस्किल हो जाती, सुबह शाम मुझे अपने चाचा के घर जा कर दूध निकलना होता है।  परसो तो चाचा ने हद ही कर दी, उन्होंने पास  आकर मेरा  हाथ को जोर से दबा दिया और कहा की मुझे उनसे दूध निकलना सीखना होगा। मैंने भी घर वापिस आकर माँ से कहा की मैं कल से चाचा के घर दूध दोहने नहीं जाउंगी।  माँ ने बस रोना पीटना शुरू कर दिया।  कहने लगी अगर तेरी जगंह कोई लड़का पैदा होता तो क्या वो भी अपनी माँ के साथ यही सलूक करता।  तेरा भाई तो अभी छोटा है, नहीं तो क्या हमे  ऐसे किसी और से अनाज की मदद लेनी पड़ती ? माँ का बोलना देर रात तक बंद नहीं हुआ।   पता नहीं कब मेरी आँख लगी सुबह देखा की माँ की बड़ बड़ एक दम ख़ामोशी मैं बदल गयी है, दूध का बर्तन हाथ मैं पकड़ा हुआ है  और फिर थोड़ी देर मैं मुझे देख कर बोली की रवि  नहीं संबलेगा तुझपे, जा बात मान दूध दुहने चली जा।   तेरी चाचा चाची आयेथे रात को बोले की  धुनि वाले  महाराज दुबरा आ रहे  है गावं मैं , आज रात धुनि लगा के पूरी  गाव को  आशीर्वाद देंगे जा जल्दी से काम निपटा कर आजा।  शाम के वक़्त माँ जल्दी जल्दी तयार हुई, पुराने बक्से मैं से एक नयी ओढ़नी ,पिछोड़ा  निकला। माँ को बहुती उम्मीद थी ,  एक हाथ मैं फूलो की  थाल, और दूसरे  मैं एक लाल रंग कि चुनरी लेकर माँ पंगडंडी पर तेज़ी से मंदिर  कि तरफ बढ़ती जा रही थी।... थोड़ी  ही देर  के  बाद मुझे ढोल  कि  आवाज  आने लगी, जैसे मधुमक्खी के पंखो   की आवाज  होती  है  न  कर्कश   कुछ -  कुछ  वैसी   ही आवाज।

गीता के कानो मैं वह आवाज धीरे धीरे तेज़ होती चली  गयी, और थोड़ी देर के बाद ही गीता उस भीड़ का हिस्सा थी जंहा पर बाकी के लोग भी धूनी वाले बाबा के आशीर्वाद के इंतज़ार मैं थे।  हमे उस भीड़ मैं बैठे हुए एक घंटे से जायदा का वक़त हो चूका  था।  माँ लगातार कह रही थी चाचा  उनके  प्रमुख सेवादार  है , और हमरा नंबर जल्दी  आएगा  लेकिन ऐसा कुछ नहीं  हुआ, लोग एक एक कर के धूनी बाबा के पास जा रहे थे, धूनी बाबा के बांये वाले  बगल मैं चाचा  बैठे हुए थे, चाचा  लगातार चिलम तयार कर रहे थे , और बाबा कि दाए तरफ एक औरत बैठी थी, माथे पर गाढ़ा  लाल सिंदूर  का लम्बा  तिलक, आँखों मैं गहरा दूर तक लगा सिंदूर।   गाव के लोग एक एक कर के उसके पास अपनी समस्या लेकर   जाते   बदले  मैं या  तो थपकी मिलती या फिर धूनी कि उड़ती धुल थपकी मिलते ही काम बन  जाता लेकिन धुल का मतलब कि धूनी बाबा की लम्बी  सेवा की तैयारी।
   
जब हमारा नंबर आया तो चाचा ने धूनी बाबा को इशारा किया और धूनी बाबा ने माँ कि जगंह मुझे थाल लेने के लिए कहा,  धूनी बाबा की डरवानी लाल आँखों के सामने मैं बेबस थी, माँ ने मुझे थाल पकड़ा कर आगे कर दिया। फिर मैं धिरे धीरे उस औरत  के सामने  बढ़ी , मैं उसके थपकी  के लिए तैयार  थी।   तभी चाचा ने जोर से कहा देखती  क्या है  मुर्ख  लड़की? ये  साक्षात्   देवी  है दंडवत प्रणाम  करो  इन्हे  जैसे ही मैं निचे झुकी तो  देवी ने मेरा हाथ  कस कर पकड़ लिया, और फिर धूनी की  राख का मुट्ठा भर कर मेरे चेरे पर फैक दिया।  और जोर जोर से सर हिलाने लगी, डर के मारे मेरे हाथ  पैर ढीले पड़ गए, ऐसा लगा की शरीर मैं जान ही नहीं है , तभी धूनी बाबा उठे और अपने जल से देवी के ऊपर छीटें मारे, और जोर से बोले बता देवी तू क्या चाहती  है , देवी का  सर हिलना  अभी बंद नहीं हुआ था।  सर हिलाते हुए ही उसने कहा की वो मेरे शरीर मैं आना  चाहती है। मेरी सेवा लेना चाहती है सात  दिन की मेरी सेवा लेकर वो मुझे जो चाहे वर देगीं।   फिर वो औरत बेहोश हो कर गिर गयी धूनी बाबा ने गाव के लोगो को मुझे प्रणाम करने को कहा.. थोड़ी  देर   के बाद मैंने देखा माँ समेत  सब लोग मेरी तरफ झुके कर मुझे प्रणाम कर रहे  थे।

     फिर  एक सप्ताह के बाद मुझे त्रिभुजाकार आकृति  के बीच मैं बिठा दिया गया।  और पिने के लिए एक नारियल का पानी दिया गिया।  जाने क्यों पर अचानक ही वह पानी पिने के बाद मेरी सारी बेचैनी दूर हो गयी।  मुझे लगा कि ये  धूनी बाबा का चमत्कार है , फिर  थोड़ी देर के बाद सब कुछ धुंदला होने लगा ऐसा लगा की जैसे कुछ छूट रहा हो।  तभी   कमेरे मैं चाचा अंदर आये। उन्होंने आकर मेरे गालो को सहलाना शुरू कर दिया।  मैं चाहकर भी विरोध नहीं कर पा रही थी।  पर गुस्से मैं मेरा पूरा शरीर थरथरा रहा था, ऐसे मैं मैंने पहेली बार माँ देवी से पार्थना की वो इस दैत्ये से  मेरी रक्षा करे।  उसके शारीर के बढ़ते दबाव को मैं अपने शरीर पर महसूस कर सकती थी। मेरा हर अंग इसका विरोध करने को जैसे तड़प  रहा था।  माँ भवानी का नाम लेकर मैंने, जोर से अपनी टांग को उसके पेट पर मारा . और नशे धुत चाचा थोड़ी  दूर जा  कर  गिरा, वो phir से उठा aur  भद्दी गलिया देते हुए मेरे पास दोबरा  आया , इस बार मैंने कमरे मैं पड़ी  हुई दरांती को उठा लिया।  वो नशे मैं मेरी तेज़ी से मेरी  तरफ आगे मैंने भी दरांती से uspar vaar kiya उसने अपने हाथो khud को बचा लिया लेकिन केले के छिलके  पर पैर  फिसलने के बाद सीधा  कमरे की खिड़की से बहार गली जा गिरा। थोड़ी देर मैं गाव के लोग और धूनी बाबा कमेरे आ गए। चाची जोर जोर से गला फाड़ कर चिलाने लगी , मुझसे रहा नहीं गया और उसके पास जा कर उसके बाल  पकड़  कर मैंने जोर से उसके गालो पे दो थपपड जड़ दिए।   थोड़ी देर के लिए जो शोर मचा था वो शांत हो गया।  मेरा शरीर अभी भी डर से थर्रा रहा था।   इसी बीच अपनी माँ को देख कर मेरे गला भर आया और माँ कह  कर मैं उससे लिपट गयी।  गाव वालो ने  मेरी माँ से  कहा कि तेरी बेटी ने हत्या कि है इसका फैसला अब धूनी बाबा ही करंगे.  धूनी बाबा ने सभी गाव वालो कहा  ये हत्या नहीं है पर बलि है, माँ  ने साक्षात् आकर गाव वालो पर प्रस्न हो कर बलि ली है अगर अब भी हम ने इस लड़की को कुछ भी किया तो पहाड़ पर और मुसीबत टूटेगी।    पूरी रात भर धूनी बाबा  ने मेरी माँ को और गाव वालो  को समझया की तेरी बेटी अब तेरी नही है वो देवी है और देवी का भक्त होने के नाते उसकी सेवा अब  वो ही करेगा।

अगले दिन  भरी  पंचयत मैं ये फैसला कर दिया गया , मेरा घर ही मुझसे छीन लिया गया।  माँ ने भी मुह  फेर लिया।  जैसे उस  कुछ पता  ही न हो।  पुरे गाव ने मुझे उस धूनी बाबा को देकर सारे गाव कि सुख सम्पति को सुरक्षित कर लिया, और मुझे देवी बना कर माँ को भी जिंदगी भर का आनाज और कपडा मिल गया।  

कुछ दिनों तक गाँव के लोगो का आदर सत्कार गरहन करने के बाद मैं धूनी बाबा से वापिस घर जाने की बात की, तो एक ही जवाब आया ऐसा क्या करने वाला था तेरा चाचा जो तूने उसका क़त्ल ही  दिया  इसकी  सजा जानती है न तू, तेरे घर वालो को गाँव से हुक्का पानी बंद कर देंगे ।

इसके बाद हमने बूंदी छोड़ दिया और आस पास के गावो से और छोटे शहरो से होते हुए वो  मुझे एक बैलगाड़ी मैं देवी बना कर घूमने लगा । बड़े बड़े लोग मेरे आगे झुकते चढ़ावा देते   और मेरा काम था लोग की पीठ पर जोर से थपका मरना।  धूनी बाबा की औरत मुझे बड़े चाव से तयार करती और देवी बनाकर बैलगाड़ी पर बिठा देती। मुझे पता नहीं की मेरे द्वारा दिए गए आशीर्वाद से किसी का भला हुआ की नहीं।  पर मैंने अपना भाग्य स्वीकार कर लिया था।  रात को हम कंही भी रुक जाते , कभी जंगल मैं , कभी नदी किनारे और कभी शमशान घाठ पर ही रात बितानी पड़ती।  
ऐसे ही एक रात को जब मैं  अपनी बैलगाड़ी के अंदर  ही सो रही थी तो मुझे धुनि बाबा कि औरत कि रोने और धूनी बाबा की चिलाने कि आवाज आयी।  थोड़ी देर के बाद बाबा मेरी पास आये... उसके अंदर आते ही शराब कि बदबू  पूरी गाडी मैं फैल गयी।  मैंने पिछसे हटने कि कोशिस कि लेकिन उसके हाथो से मैं बच नहीं पायी।
अगल दिन से धूनी बाबा कि औरत की आँखों मैं मेरी लिए  नफरत भरी थी, उसने मुझे  तैयार करना बंद कर दिया।  फल और चढ़वा अपने पास रखने लगी , एक दिन तो मुझे उससे झगड़ कर अपना खाना  लेना  पड़ा
ऐसे मैं एक दिन हम एक शमशान घाट मैं  रुके पास मैं ही जलती हुई चिता मैं से चिंगारिया फूट फूट  कर थोड़ी देर के लिए उड़ती और फिर हवा मैं  ही  विलुप्त  हो जाती। थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से धूनी बाबा की चिलाने और उसकी औरत के रोने कि आवाज सुनी। मुझे नहीं नहीं और रोने  के अलावा और कुछ नहीं सुना , मेरा दिल जोर से धड़क रहा था।  फिर एक गाडी के आवाज ने थोड़ी देर के लिए उसके रोने की आवाज को दबा दिया। लेकिन अब उसका रोना और भी जोर से होने लगा था।  फिर थोड़ी देर के बाद सबने शराब पी उस गाडी मैं जो आया था उसने एक  बैग बड़े स्वामी को दिया पास मैं ही धुनि बाबा की औरत या फिर मुझे से पहेले की देवी निढाल पड़ी थी।  कुछ देर के बाद हमारी  बैलगाड़ी ने चलना शुरू कर दिया।  अब  मुझे एक बात तो समझ आगयी थी , धूनी बाबा अपने लिए किसी को भी मार सकता है , लेकिन न तो मैं इस जगह को छोड़ सकती थी न ही इसका विरोध। फिर से मेरा गाव गाव घूमना शुरू हो गया।  थोड़ी दिनों मैं मैंने पाया की मुझे मितली ज्यादा ही आती थी।  और ऐसा भी वक़त आया की मेरा चलना मुस्किल हो गया।  अब धूनी बाबा मुझे और ध्यान  से डख कर दुनिया के पास लेजाते थे।  थोड़े दिनों के बाद मैं एक गाव मैं हम कई दिनों के लिए रुके।  वंहा पर एक ७-८ साल का बच्चा हर रोज मेरे पास आता , मैं उसे आशीर्वाद और बदले मैं कुछ न कुछ मीठा  जरुर देती।  बच्चा अब हर रोज हमरे पास आता था।  एक दिन मैंने उससे पूछा  की उसका नाम क्या है लेकिन कोई जवाब नहीं आया।  लगता था कि वह बोल नहीं पता था। लेकिन मैंने उसका नाम रवि रख दिया  अगले  दिन मैंने रवि को धूनी बाबा के साथ खेलते पाया।  मुझे रवि कि चिंता होने लगी।

उसी दिन मैंने उससे कुछ प्रसाद दिया  औरउसको कहा की वो कभी वापिस ना आये। रात को ही हम गाव से रवाना हो गए मैं  जागती रही, रवि के बारे सोचते  सोचते  मुझे  कब नीद आयी पता नहीं चला ।   अगले दिन रवि को धूनी बाबा के कंधे पर बैठा पाया। उससे वहना देख कर मुझे गुस्सा आया और बैलगाड़ी से निकल कर मैं रवि को धूनी बाबा से अलग कर लिया और सड़क पर भागने लगी।  पर अपने अंदर के भार से जैदा देर दौड़ नही पायी।  धूनी बाबा ने फिर से रवि को मुझसे छीन लिया और मेरे बाल  खींच जमीं पर गिरा दिया। अपनी मर्जी से आया है। पूछ ले इससे , बोल कर धूनी बाबा वह से चला गया।    

थोड़ी देर के बाद मैं और रवि दोनों बैल गाडी मैं बैठे हुए थे।  फिर रवि बोला तू चिंता मत कर मैं तुज़े यहाँ से लेजाने आया हु।  मुहे ये जान कर बहुत ख़ुशी हुई की वो बोल पता है।  मैंने उससे पूछस क्यों रे तुज़े अपने घर कि याद नहीं आती है  उसने ना मैं गर्दन  हिला  दी। मुझे पता था कि वो मेरे लिए ऐसा बोल रहा है। अमावस कि रात से पहेले हमारा डेरा नदी किनारे वाले शमशान घाट मैं लगा , अब रवि ने शोर मचना शुर कर दिया।  एक तो जलती हुई चिताए ऊपर से अघोरियों का शोर।  मैं उसे काफी समझती रही कहती  रही कि मैं उसको भगा  दूंगी और वो वापिस अपने गाव चले जाए।  उधर धूनी बाबा ने सबको शराब देने कि ड्यूटी मेरी लगायी थी।   थोड़ी देर के बाद फिर से चमचमाती हुई एक कार वहाँ से पर आयी , एक सूट बूट पहने व्यक्ति वंहा पर आया, उसकी शकल मैं भूल नहीं skati थी ye वो ही था जिस  दिन धूनी  बाबा ने अपनी औरत की बलि दी  थी । उस आदमी  पूछा 'कब होगा मेरा काम?' तो धूनी बाबा के महाराज ने बोला की पिछले बार बांज कि बलि दी थी इस बार बच्चे का इंतज़ाम करना है।  तो धूनी बाबा ने कहा कि बच्चे का इंतज़ाम हो चूका है वो बैलगाड़ी मैं।  ये सुन कर मेरे पेट मैं जोर का दर्द उठ गया।  मैं उसी समय  जमीं पर घुटने के बल ही बैठ गयी ऐसा लगा कि मेरे पैरो कि जान ही निकल गयी  हो  ।  एक बार फिर से मैं उस स्थिति मैं थी। धूनी बाबा ने रवि को बैलगाड़ी से उठा लिया रवि जोर से चिलाता रहा।  मेरा वादा जो कि मैंने रवि से किया था मेरे दिमाग मैं गुज रहा था। अघोरी ने थोड़ी देर के बाद कहा की जो इस से प्यार  करता  है वो ही इसकी बलि दे तो ही ये बलि फैलगी  . इस पर मुझे चुना गया ,   रवि को फूलो  कि माला पहनवाई गयी  थी उससे  एक लाश के ऊपर उससे बिठा दिया गया था।  हम सब लोग उस लाश के चारो तरफ बैठ कर शराब पी रहे थे थोड़ी देर तक मैं उन सब के साथ शराब पी कुछ देर पिने के बाद मुझे लगा की मैं कई सारी बोतल पी सकती हु।  जलता हुआ हवन, उस मैं आती साम्रगी   खुसबू  सब के दिमाग पर असर कर रही थी।  फिर रवि पर मेरी नज़र गयी वो प्रसाद मैं मिलायी गयी  दवाई के असर से आधा मदहोश था लेकिन फिर भी माँ माँ कह कर मंद मंद बोल रहा था। मझे लगा अगर मैं ही खुद को मारडालू तो रवि बच जाएगा लेकिन फिर भी इस बार भागने से काम नहीं चलेगा। समय समय पर मेरे पेट का जिव भी अपनी लात मार कर जैसे मेरे विचारो का समर्थन कर रहा था।

 फिर मेरे हाथो मैं एक तलवार पकड़ा दी गयी।  मैं कापते हुई आगे बढ़ी और बच्चे कि गर्दन पर तलवार को छुआ अघोरी ने हवन कि आग कि तरफ इशारा किया।   और फिर मैंने वह तलवार आग मैं डाली अघोरी ने फूल, नारियल का पानी तलवार पर गिराने  के लिए आगे बढ़ाया। अघोरी नाथ का सर बिलकुल मेरे तलवार के निचे था।  ना जाने कैसे पर मेरे हाट ऊपर उठे और उसकी गर्दन कि तरफ बढे।   पर इस पहेले की तलवार उसका सर काट पाती वो अघोरी पीछे हट गया।  फिर भी उसकी गर्दन पर तलवार का कुछ हिस्सा लगा जो कि उससे पस्त करने के लिए काफी था।

फिर  रवि कि बांह पकड़ कर उसको गोदी उठा कर भाग पड़ी। धूनी बाबा भागते भागते  मेरे पैर को पकड़ कर मुझे गिरा दिया।  लेकिन मैं एक सामने पड़ी एक ईंट मेरे हाट मैं आगयी और उस ईंट को मैंने उसके सर पर मार दिया उसकी पकड़ थोड़ी कम हुई तो मैं दुबरा से भागने लगी , अघोरी नाथ के दूसरे साथी अभी मेरे पीछे पड़े थे।  मैं बेतहाशा दौड़ी जा रही थी।  धीरे धीरे उन लोगो का शोर कम होने लगे।  और उस शोर कि जगह मुझे गंगा के घाठ से आती हुई।  घंटियों और शंखो की आवाज सुनाई  देने लगी।  और गंगा नदी मेरे चारो तरफ घूमने लगी , ऐसा लगा जैसे मेरा सारा शरीर  हल्का हो गया हो।  रवि कि मंद मंद माँ माँ की आवज अभी मेरे कानो मैं गूंज रही थी। मैं खुद को गंगा के घाट पर पड़ा हुआ देख पा रही थी , खून से लतपथ पर दो नयी जंदगी के साथ मेरा शरीर  वंही पड़ा हुआ था।  आज मुझे लगा की मैं सचमुच की देवी बन गयी।  अब मैं फिर से शांत होने लगी मेरी धड़कन और मंद और मंद होती जा रही थी  धीर धीरे उजाला बढ़ता गया और फिर असीम प्रकाश मैं समां गया  |




      

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

THE LIBRARY (Film Story synopsis)

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THE LIBRARY


This is  the real  joy … Yes this advertisement in the left corner of the news paper is the real joy. And I am assuring that this joy will be mine.

After Six months passing the course of B.Lib it is first time I seen an advertisement for the job of a librarian.

I told this to my mother who is the single reason that today I am educated and alive. She deserves the happiness that she has sacrificed for me.

Today is the day I have first time broken my saving. Every single rupees, every single coin that I received from anywhere was deposited in this little saving jar that I named ‘Aladdin’

But before going to  Kumaon I wanted to assure that they haven’t hire anyone else So I called up and finally today 12 the April 2012 I reached  Kumaon  after a 18 hours journey which consist of 12 hrs. journey through train and then 6 hours journey through the bus

This is a little village surrounded by beautiful Himalaya Valley and a library in this village is as much surprising as these mountains.

But when I reached the place I was wrong. I felt that it was a palace made by some former King of this area. When I entered in the hall a receptionist saw me and welcome me by calling up with my name
‘Ramesh … Right ?  You are most welcome to the hills?

Please take your seat till the time I call Madam who will take your interview

The Sofa of the hall was such that it almost sucked my body although I was coming after a long journey I wanted to finish my interview as soon as possible.

I was thinking and counting the possibility of getting the job or in a case I don’t make it I had to stay here in some Dhramshala or cheap hotel  

    
My thoughts were broken when I heard a voice of lady from behind.
‘Mr. Ramesh Weclome dhanloti hope you had a pleasure journey’.

I said thank you very much madam … She was wearing a black sari and she made herself sit on the opposite side of the sofa . She must be more then 50 years old but she looked fine

As She started taking my interviews all the normal questions where did you study how much marks you get in B.Lib degree , do you smoke etc etc

Finally she told me that she liked me but final decision will be taken by the Guru Jee

Then a tall black color face man enters in the hall .

He asked me about my date of birth, my rashi, and started calculating his horo-socpe . I was little surprised but I had to have this job

Then he asked me if I ever had Sex or Am I a real virgin. This was an abusrd question but I answered truly I never had sex I even never met any girl in my life

Guru jee seemed happy and told me that there is nothing wrong and they can hire me . But for a month I had to live according to their instruction

I can not make a call back to my home, I won’t be allowed to come outside from the library . They told me that wanted to test my aptitude as an librarian.

As I was a needy for the job I said yes for every question and in return I was given a gigantic big and very beautiful library

I was surprised to see such a gran library in this area. So I asked the secretary who was helping me with my luggage to carry it to the library . That I hope we have few people who come to study in this library

She just smiled  and took me inside the library …  and shown me my room. When I was passing through the library I saw a big door with a big lock
She told me that No one is allowed to ask any question about that door and it is in my interest that I do not try to know what is in the door    


Next day I came to the library to start my first day of job. The library door was open it was just a one month test and I believed that I can pass it after all I am getting good food and place to live
That day no one came in the library

Second day passed with the same routine arranging the new lot of books , seeing the old books and making a list of for new book, and no body came

Like wise `15 days passed no one came to study in the library. That was not a problem but it was really boring to be inside the library without any work.

It was  another day when in my desk I find a wrapped cigarette    foil  … on it ISBN number was written. Must be done by previous library a bored librarian what else he will do . But how they kept someone who smoked the like wise they kept me I went to my room and bring out cigarette and lit it up watching carefully the ISBN NUMBER written on the cigarette foil … Why any one in this world will write ISBN Number on the cigarette foil

I rushed to the library and searched for that book. And I find a book and I find that some one has marked the book and first chapter has been marked with lines

The words have been marked when I made a word from the marked word It made butterflies in my stomach …  the marked word mean
“Run Away”


What is the secret of the library what Ramesh will find in the library and why he has been told to stay in the library . To know more about it call me ask for  screenplay

सोमवार, 7 नवंबर 2011

New show Law and order

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 LAW AND ORDER 

Law & Order
 
Victims of Ignorance 
Conceived by Mayank Tripathi
Develop and written by- Abhishek Bhardwaj
Phone-+919999918466



               





Log line

Outrageous but true stories of people who become victim of Law due to their ignorance about the Law and Order but the time they knew it was too late for them.












SYNOPSIS

Name :-  Nirmal Sharma date 29/10/10 day Friday. I remember I  taken  off from my  office  to  take  my  mother  to  the  hospital.  I  was   getting  ready  to  take  father  to  the  Ashirwaad Hospital. Before  I  could  grab  my  bike  keys  someone  ring  the  door-bell. My irregularities have become common in  the  office I  thought  for  a minute  and may  be  someone  is  from office to  deliver  the files to audit. The  day  Neha  left to  her  home my irregularities were common in  the  office  I  had  to  take  hospital  either  to  my Dad.
But to  my  surprise  at  the  door  front  there  was  police  cop with two constables. When I opened the door he told me that he has arrest warrant  against  me under section 498 A. My In-law have filed FIR for Domestic violence. 
To  see police putting cuffs on  hand  my  father and mother  got panic  and  starting pleading  in  front  of  the  police  officer. 
However police inspector  never  listen  to us  took me in his  jeep towards  the police  station.  It  was 3 o clock when I was sitting in  interrogation room already  been slapped and beaten  by cops I was asking water but instead of water they thorough  smoked on face for the whole day. 
The best part that my in-law did was to complain FIR on Friday so that I can not get the bail. This way I spend almost a week in the jail for crime I never did.



Nirmal  Sharma  is  not  the  only  victim  of law and order ignorance. If  Nirmal Sharma  would have known his right It would be hard for Police to arrest him.
The LAW & ORDER docu-style non-fiction show presents the shocking stories  of  people  who become  the  victim of  law due  to  their  ignorance  and  in  law,  ignorance  has  no  excuse.
The show  Law & Order  aims  to  show  the  stories of these victims hence has purpose to educate people about law of the land so that they get knowledge of what is Law & Order.

   
       

TREATMENT


Law and order show aimed to be a Docu-Series.  The show  is  will be designed with combination of reconstruction plus   bytes   of  victim and  his  relatives, friends, lawyers who helped him during the suffering. 
Law and order tv show series will focus on a specific real world cases of people, who become the victims due their ignorance about the law of the land. It includes people from   profession, lifestyle, family, business.  Hit docu-style series include; "Deadliest Catch", "American Choppers", "Dog The Bounty Hunter", "Flipping Out", "Real Housewives", "L.A. Ink", other countless shows.









बुधवार, 24 अगस्त 2011

Concept DESI ICON

DESI ICON 

Logline :  

'DESI ICON'  Is a show of people who are the real hero's  of our neighbor hood. The amazing stories of people who fight for what is right. Who stands for their dreams. Who achieved their dreams in spite of every hurdle. 

Synopsis 

'Desi Icon' Represents a movement of people who dared to dream. who dare to change their destiny and people around them....   

  


रविवार, 17 अप्रैल 2011

TAPISH

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 Written By Abhishek Bhardwaj 
Tapish   

Misery creates pains
Pains creates Anguish
Anguish creates Courage
Courage creates rebel.

Original story was written in accordance of Haryana but I Believe that it has great scope to shift the location anywhere  the country.  

Kuljeet  always accepted to stand  for  the  cause  whether  it  was  anti-copy campaign  in  school days   or  be  it  an  argument  with  family  for  participating  in  fashion  show  in  the school.  

Kuljeet  always  faced  these  challenges  and  came  out  as  a  winner.  That’s  what  makes  her  special  in  this  small  Village  of  Haryana/Bihar  Called Sameru (Fiction name) .

Life  back  at  village  for  the  father  of  Kuljeet is  not  that  easy.  Postmaster Sukhbir Singh belongs to an orthodox Haryanavi/Bihari family. 

Family  never  liked  Sukhbir Singh’s  idea of  educating  Girls, ‘Biro’ mother of Sukhbir Singh always cursed ‘Dayavati’ wife of Sukhbir Singh for not able to produce a boy child in the family.

For the desire of Boy child  Dayavati produced 3 Girls Sonal Singh, Pritti Singh, and Jyoti singh.

Kuljeet was  the  first  girl  in  the  neighborhood who  crossed  the  border  of village  and  went to  study near by  town. 

The college  was  the  place  where  she  could  have  achieve her dreams. The dream of becoming an IAS officer. But life is not that easy the very first day she encountered  Bali’ the guy from the near buy village who was doing the ragging   to the newcomers  in  the  college. 
  
Bali  though  was  a good  rival  but  he  could never found the solution for the natural leadership for the Kuljeet.

AT the same time Randeep enters in the college and shows much interest in the campaigns started by Kuljeet and both Kuljeet and Randeep successfully stops ‘Bali’s misdeeds in the college  

Randeep  belongs to  the same village of  Kuljeet but  Kuljeet doesn’t  have any idea about it. She Finds that a guy ‘Bittu’ standing in the back of the group lead by Randeep. She knows Bitto as Bitto is the next door guy he is the Brother of Gurudevi. 

Bittu tells Kuljeet that  Randeep is  from  the  same  village and  came  back  from his  uncle  village after 5 years study. But Kuljeet is unable to recollect any thoughts about Randeep.

Randeep  who  have  a   bike  to  go  the college  starts  picking up Kuljeet from  the  halfway of  village.  On  the  way  Randeep  tells Kuljeet that  He is going to compete in the College Election this year.  As he don’t want ‘Bali’ to give a easy win as he can use this power for his misdeeds  

Kuljeet gets excited and supports Randeep, in the college and city Kuljeet and Randeep starts campaigning for the candidature of Randeep as a college student president. 

Randeep gets huge support because of his popularity. The Sunday morning after the match practice when Randeep was coming back from the college gets attacked by ‘Bali

Kuljeet gets this news and went to see Randeep in the hospital. The injuries were very bad

  
This makes Kuljeet and other group  worried about the election and ask Randeep what will happen to campaign.  Randeep calls Kuljeet e and holds her hand and tells that now Kuljeet will fight this election in his place.

Kuljeet try to refuse but because of the pressure from Randeep and friends she was unable to refuse the offer.

Kuljeet starts campaigning with very strong way. She first collects the entire main group and tells that we need to give answer to the opposite.

They sale Drugs in the campus says someone from the group. This is what Kuljeet needed. She with the help of her group captures the photographs of ‘Bali’ smoking and delivery of Drugs. 

College principal rejects Bali’s application for to fight for the election.

Meanwhile the news that Kuljeet is going to participate in the election amused everyone in the village. Instead of stopping her Post master Sukhbir supported her fights hard with the local criticism.

Next day Kuljeet and her group with Randeep were celebrating there expected victory in the election in the city hotel.

All of a sudden police comes to hotel and arrest all the girls and Manjeet.  While Kuljeet was taken to prison she finds ‘Bali’ in the jeep smiling and looking at her.

Randeep start calling his friends they all reach police station where Inspector ‘Baldev’ tells that they have been captured in the hotel in shame full condition & can not be released. 

Because of courts holiday Kuljeet’s friend were unable to bail her Bitto who was going to take help from the his MLA gets beaten by ‘Bali’ Group    



This news spreads like a fire in the village and sky falls on the family of Sukhbir.

On the other hand Kuljeet finds that Randeep has been released by the police.  Now a long dark night without a  horizon  was   waiting for Kuljeet.  Will Kuljeet be able to see the ‘light’ every again.

How her family going to manage this? Will her father who was there in every moment will support her. Thinking of all  that Kuljeet closes her eyes while sitting in the dark corner of jail…  

Abhishek Bhardwaj 




   
            
 

       

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

Paisa Bolta Hai

‘Paisa Bolta Hai’

(A Reality based television show by Abhishek Bhardwaj)

Concept By: Abhishek Bhardwaj

Title of the Show: ‘Paisa Bolta Hai’

Format of Show: Reality

Log Line

An Anchor driven show where the anchor makes different people do things that they hesitate to do in their normal course of life and get paid accordingly.

Synopsis

So what does it take to make you dance upon my tune… just a few bucks!

Paisa Bolta Hai? Yes it does, it has for eternity been a quest that what is that thing which can bring out your greed, in schools, we all must have heard about a simile ‘what is as greedy as?’ And answer used to be- ‘Dog' But we are on a mission to find a much greedier creature than a dog. In this our Anchor is on a where he looks for the real greed in normal human beings.

Our anchor will visit different places and will meet random people to offer them some tasks. These tasks can be ugly, embarrassing, nasty and naughty. Our anchor will offer them a certain amount of money, and he will keep increasing the amount until and, unless any person on the road is ready to perform that task.

So to what extent you can resist your greed?

Treatment

Paisa Bolta Hai is a realty show which is driven by the Anchor. We will choose random people from the different places of a city and the Anchor will pick any causal person to perform the different tasks. Each Task will have a Starting Price depending upon its difficulty level. If anyone refuses to do the particular task with that starting price the anchor will increase the amount to an extent that he/she gets ready to perform the task. If still anyone refuses to perform the task, we will switch to another person with the last increased price and will keep looking and increasing the price of the task until and, unless someone agrees to do it.

If a task in an episode is not closed then this task becomes open to the viewers. In that case, we will increase the price money ten times. Say if our anchor, for a particular task reaches to the amount of Rupees 5000 and the task stays unperformed throughout the episode then the anchor will increase the amount by ten times that means Rupees 50000. However, there is a condition that every minute the amount of one thousand rupees is getting detected from the increased amount. So the viewers have to call us as soon as possible to earn the increased amount; we will close the bidding on the lowest bid offered by any caller.

Target Audience

it’s a show full of fun and wit so every viewer is going to like it in some way or the other. But our target audience is aging between 15 to 45 years of both sexes.

Contact information

Abhishek Bhardwaj

9711899059

abhishekfilms@gmail.com

for more information please log on to

https://abhishekfilms.blogpsot.com

Paisa Bolta hai

Paisa Bolta Hai

Episode one

01

Fades in:

Shows Lots of 100 Rupees Notes on the screen and a slow air blows, the logo of Urban Frames UF gets on the screen in existing color but with green shadows

Fades in:

We show a Chaat wala, a Halwai, a paan wala all counting the money but on the last one we tilt up the camera towards the sky.

02

Cut to

Fades in

From the sky we pan camera and the top side of Kutab Minar been shown on the screen. Camera tilts down and shows peanuts sellers or may be some other vendor on the road and a buyer who offers the vendor some money we freeze the frame while that vendor is getting the money. While getting the money vendor will give a look into the camera and we will pan our camera towards the crowd freeze the frames

03

Cut to

Fades in

From freeze frame crowd we again pans the camera on to theatre movie cinema house may be delight or Golcha.

Show a black ticket seller, doing the black. For permission concerns we can show that person standing in front of Film Poster.

04

Cut to

Fades in

Lots of Currency and 100 rupees notes on the screen a little air blow comes and pushes away these Notes and currency away and the Text comes on the Screen ‘Paisa Bolta Hai”

05

Cut to

Fades… In

Hand held camera, with the suggestions of our anchor, Our Anchor chooses a random person on the road.

Anchor: How about to earn rupees 300 for doing a

simple task for me…. We show the other person face from our camera and our camera person now moves towards the person and shows our anchor… our anchor explains the things to the person. And he rejects that he is not interested. Our Anchor gets ahead with his mission to pick another one who will do this work for him. Finally one person gets ready and our firs anchor links comes

06

Fades in

Anchor Link one: we show our anchor talking to camera (looking into the camera)

( when the performer is wearing the superman shirt) : Aap Ke baap ne bachpan main apko ek baat samjahi thi,,, ki beta baap bada na bhiya sab se bada ruppiya’ aap ke baap ne or ye hi hai hamra show Paisa Bolta hai kyoki tum wo karoge jo main chahunga … shows money and says ‘ Iaske Dump

07

Fades in

Task one

Starts with a Task called I am a Super Man … We show our anchor is convincing people to become superman and irritate people by forcing them to take help from him. Like offering a help to an old man and he convinces person to perform

Anchor link ( when the performer is wearing the superman shirt) : Aap Ke baap ne bachpan main apko ek baat samjahi thi,,, ki beta baap bada na bhiya sab se bada ruppiya’ aap ke baap ne or ye hi hai hamra show Paisa Bolta hai kyoki tum wo karoge jo main chahunga … shows money and says ‘ Iaske Dump e…

Anchor is giving money to the task performer and task performer is telling in front of camera …. Paisa bolta hai

Anchor Link two

Iss task ko kar ke bhut kush nazar aa rahe hai Bhaisabh, aap waha screen piche baithe hue ye hi soch rahe ho na ki iss tu koi bhi kar sakta tha, Shabu ka beta sonu bhi, pados ki ladki pinki bhi, arrre evan papu can fly saala … Par Paise ke Taqat ko aap ne mahsoos nahi kiya, Per aap aage dekhiye paisa ke liye log kis had tak jaa sakte hai …. Lekin iss commercial break ke baad

Commercial Break

Task and Anchor link Three

Panipuri task (eating others panipuri task)

We show our anchor with two beautiful sexy girls one of the girl offers him one panipuri and he eats one piece and the other girl gives him a sexy look, and our anchor gives them money walks towards the camera and says …. Iska Clarification chahiye.

Anchor Link four

Hindustan ek Adarsho ka desh , yaha ke har maan baap ko aaj mujse nafrat hogi, wo jindgi bhar sikhate rahe ki kissi aur ki cheez per nazar bhi mat dalna, magar main aapko usper haat daalne ke paise dunga

Panipuri ke plate 15 rupees ki lekin usi paani puri plate ko chin kar kahne ke 1000 rupees milnege

Anchor link five required

Task three starts

We show our Anchor is in the Mall and coming down from Escalators holding and reading the book of Mast Ram

Cut close of our anchor

Aisa kaya dekh raho, aisa kaya hai mere haat main, sab padthe hai batta koi nahi hai, aapke paas wale neb hi padi hogi. Khule aam ye sab karne se darte hai sab karege Iske dum per …

Anchor Link Three: Task four: Adam teasing

We show our Anchor with two gay and those two gays are looking at them one gay holding a case opens it , this case has two packets Chewing gums two bundles or rupees and one goggle, gay one puts chewing in his mouth and gay two gives him goggle to wear. Our anchor gives them few rupees and gays out of frame and our anchor comes towards the camera and says …. Bhade ke the

Anchor link continues: Dada ne dadi se shaadi ki tu dad hue, dad ne mom se shaadi ki tu main hua …. Kuch hoga kaya ? Aaj har maan beti ko chod kar bete ko bolti hai ki ghar jaldi aa jana apne phone ke dial list main police number juror rakhana, kyoki bhar Adam Teasing hoti hai

Cut to Task Adam Teasing

Closing Anchor link: